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Saturday, 5 October 2013



पिछले 17 सालों में पहली बार अमेरिका आंशिक शटडाउन यानी कामबंदी के भंवर में फंस गया है. रिपब्लिकन पार्टी और सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी की राजनीतिक कुश्ती के चलते दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पटरी से उतर सकती है.

अमेरिका के कई सरकारी दफ्तरों पर ताले लटकने शुरू हो गए हैं. यह स्थिति इसलिए पैदा हुई है क्योंकि रिपब्लिकन पार्टी की अगुवाई में सीनेट ने अगले साल के बजट को मंजूरी नहीं दी.

व्हाइट हाउस ने सभी गैर जरूरी सरकारी एजेंसियों को बंद करने का आदेश दे दिया है. तकरीबन 10 लाख सरकारी कर्मचारियो को बिना वेतन छुट्टी पर भेजा जा सकता है.

क्या है बजट का झगड़ा
दरअसल रिपब्लिकन पार्टी के नेता राष्ट्रपति बराक ओबामा की ओर से लाए जा रहे हेल्थ केयर सुधार कानून का विरोध कर रहे हैं. विरोधस्वरूप वे सरकारी खर्च विधेयक पारित करने को राजी नहीं हुए जिससे जारी वित्त वर्ष के बचे हुए समय के लिए बजट की व्यवस्था की जानी है. हेल्थ केयर सुधार कानून को रिपब्लिकन नेता 'ओबामाकेयर' भी कह रहे हैं. इससे अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ेगा.

रिपब्लिकन सांसदों पर भड़के ओबामा
ओबामा ने स्पष्ट कहा है कि इस शटडाउन का सीधे लोगों पर गहरा आर्थिक असर पड़ेगा, क्योंकि अब लाखों केंद्रीय कर्मचारियों को अवैतनिक छुट्टी पर भेजना पड़ेगा. अमेरिका को अपनी स्पेस एजेंसियों व कई अन्य सरकारी कार्यक्रमों को भी रोकना पड़ेगा.

ओबामा ने रिपब्लिकन पार्टी की आलोचना करते हुए कहा कि ये पार्टी देश में फिर से चुनाव चाहती है.

अमेरिकी संसद के स्पीकर जॉन बोएनर ने कहा, 'अमेरिकी लोग शटडाउन नहीं चाहते और न ही मैं चाहता हूं. हालांकि नए हेल्थ केयर कानून का भी विनाशकारी असर पड़ेगा. कुछ तो करना ही पड़ेगा.'

शटडाउन के बारे में कुछ तथ्य
शटडाउन का कारण: संविधान के मुताबिक संसद को बजट खर्च का कानून पारित करना जरूरी है. अगर इस पर सहमति नहीं बन पाती तो सरकार पैसे खर्च नहीं कर सकती.

शटडाउन की बाध्यता:सरकारी एजेंसियां चाहकर भी इस शटडाउन की अनदेखी नहीं कर सकतीं. संघीय कानून के मुताबिक, बिना बजट कानून पास किए करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल अपराध की श्रेणी में आ सकता है.

कितनी बार शटडाउन: 1977 से अमेरिका में 17 बार शटडाउन (कामबंदी) हो चुकी है.

सबसे लंबा शटडाउन: 21 दिनों तक चला था. 16 दिसंबर 1995 से 5 जनवरी 1996 तक.

शटडाउन और कर्ज संकट में फर्क: शटडाउन के दौरान, सरकार के पास गैर जरूरी सेवाओं पर खर्च करने की कानूनी इजाजत नहीं होती. जबकि कर्ज संकट में सरकार के लिए खर्च करना अनिवार्य होता है लेकिन खर्च के लिए कर्ज लेने का कानूनी अधिकार नहीं होता.


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