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Saturday, 5 October 2013



राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखी है. जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का मसला उठाते हुए उन्होंने कहा है कि बीजेपी के पीएम प्रत्याशी नरेंद्र मोदी और उनके करीबी अमित शाह को जानबूझकर फंसाने की कोशिश हो रही है.

अपनी चिट्ठी की शुरुआत में ही अरुण जेटली ने कांग्रेस पर सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाया है. उन्होंने लिखा है, 'ऐसे वक्त में जब कांग्रेस की लोकप्रियता लगातार घट रही है, उसकी रणनीति और असली चेहरा सबके सामने आ गया है. कांग्रेस राजनीतिक तौर पर बीजेपी और नरेंद्र मोदी से लड़ने में कामयाब नहीं हो पा रही है. पार्टी को हार दिख रही है. ऐसे में जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके नरेंद्र मोदी और उनके करीबी अमित शाह को गलत तरीके से फंसाने की कोशिश हो रही है.'

जेटली ने सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर, तुलसी प्रजापति फर्जी मुठभेड़ और इशरत जहां मुठभेड़ जैसे केसों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया है कि इन मसलों से राजनीतिक फायदा उठाने के लिए जांच एजेंसी का गलत इस्तेमाल हो रहा है.

अरुण जेटली ने आरोप लगाया है, 'यह यूपीए सरकार की पुरानी रणनीति रही है. अजमेर ब्लास्ट के आरोपी भवनेश पटेल ने हाल में ही खुलासा किया था कि कांग्रेस के कई सीनियर नेता और यूपीए के मंत्री ने उस ब्लास्ट के मामले में आरएसएस नेता का नाम लेने का दबाव बनाया था.'

उन्होंने कहा, 'ऐसा लगता है कि यूपीए सरकार और जांच एजेंसी ने बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधने के लिए एक फॉर्मूला बना लिया है.'

निलंबित आईपीएस अधिकारी डी जी वंजारा का जिक्र करते हुए जेटली ने लिखा है, 'सीबीआई ने जानबूझकर इस निलंबित अधिकारी को सभी मामलों में आरोपी बनाया ताकि बाद में उसे लोभ देकर या फिर दबाव बनाकर बीजेपी नेताओं को फंसाया जा सके. पर यह रणनीति अभी तक सफल नहीं हुई है.'

पीएम से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए उन्होंने लिखा है, मेरा मानना है कि जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता बहाल करने की जिम्मेदारी आपकी है. अगर यह नहीं रुका तो इसका बुरा असर देश की लोकत्रांतिक व्यवस्था पर पड़ेगा. इन सभी मामलों में साफ है कि किस तरह से सीबीआई और एनआईए कांग्रेस की राजनीति का हिस्सा बन गए हैं. जांच एजेंसियों के राजनीतिकरण और उससे प्रेरित जांच के आरोपों की जांच सुप्रीम कोर्ट की अध्यक्षता वाले आयोग की निगरानी में होनी चाहिए.'


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